
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सासाराम की जनसभा में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा।
शाह ने कहा कि — “कांग्रेस और RJD बिहार को घुसपैठ का गलियारा बनाना चाहते हैं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी इसे औद्योगिक गलियारा बनाना चाहते हैं।”
उनका इशारा साफ था — एक तरफ मोदी का Make in Bihar विजन, तो दूसरी तरफ विपक्ष का Vote Bank Model।
“मतदाता अधिकार यात्रा” या “मतदाता भ्रम यात्रा”?
शाह ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा पर तंज कसते हुए कहा — “कुछ दिन पहले राहुल गांधी और लालू यादव के बेटे ने एक ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ शुरू की थी। लेकिन असली मकसद था — घुसपैठियों को बचाना।”
उन्होंने कहा कि बिहार में घुसपैठियों के लिए कोई जगह नहीं, क्योंकि ये लोग युवाओं की नौकरियां और गरीबों का राशन छीन रहे हैं।
“हर अवैध प्रवासी को बाहर निकाल देंगे” — शाह की दो टूक चेतावनी
रैली में अमित शाह ने कहा — “हम हर अवैध प्रवासी को देश से बाहर निकाल देंगे। राहुल गांधी को अपने वोट बैंक की चिंता है, लेकिन हमें भारत की सुरक्षा की।”
शाह ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि वे बांग्लादेशी युवाओं की चिंता करते हैं, जबकि मोदी भारतीय युवाओं को रोजगार देने में लगे हैं।
“Industrial Bihar” का रोडमैप — विकास बनाम वोट बैंक की जंग
शाह ने कहा कि आने वाले पांच सालों में बिहार को एक विकसित राज्य बनाने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। “हम बिहार को Industrial Corridor बनाएंगे — जहां रोजगार होगा, विकास होगा, और सुरक्षा भी।”

वहीं उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष किया —“वे घुसपैठियों का गलियारा बनाना चाहते हैं, मोदी बना रहे हैं विकास का रास्ता।”
“घुसपैठ बनाम उद्योग” की बिहार परीक्षा
राजनीति का नया पेपर आया है — Question: बिहार क्या बनेगा?
Options:
A) घुसपैठ गलियारा
B) औद्योगिक बिहार
C) दोनों का गठबंधन
D) वोट बैंक एक्सप्रेस
(उत्तर: मतदाता तय करेगा, लेकिन शाह का जवाब साफ है)
चुनावी सियासत का नया नैरेटिव
बिहार की राजनीतिक जंग अब सिर्फ जाति या क्षेत्र पर नहीं, बल्कि “सुरक्षा बनाम वोट बैंक” की लाइन पर लड़ी जा रही है। अमित शाह का यह भाषण उसी नैरेटिव को हवा देता दिख रहा है, जहां घुसपैठ शब्द चुनावी डिक्शनरी का नया “keyword” बन गया है।
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